सुपौल : बस स्टैंड एवं टैक्सी स्टैंड की बंदोबस्त लेने वाले ठेकेदारों पर नगर पंचायत कार्यालय निर्मली से नही हो रही है कारवाई - देखे पूरी रीपोर्ट!

सुपौल : नगर के विभिन्न सड़क मार्गो पर वाहनों को रोककर अवैध राशि वसूली करने वाले दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी प्रकरण में बस स्टैंड एवं टैक्सी स्टैंड की बंदोबस्त लेने वाले ठेकेदारों पर नगर पंचायत कार्यालय से करवाई नही की जा रही है।कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार टैक्सी स्टैंड की बंदोबस्ती वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए नगर निवासी विजय कुमार को दिया गया था वही बस स्टैंड के लिए बंदोबस्ती शम्भू शरण सिंह के नाम है।

बंदोबस्ती को लेकर ठेकेदार एवं नगर पंचायत कार्यालय प्रसाशन द्वारा किये गए एकरारनामा में नगर पंचायत क्षेत्र में कही भी परवाना वसूलने की नियम एवं शर्त दर्शाया गया है।एकरारनामा के मुताबिक बंदोबस्त ठेकेदार के द्वारा अपनी अधिनस्त कर्मी से वाहनों को रोककर राशि वसूला जाना नियमानुकूल माना जा रहा है।आखिर टैक्सी स्टैंड के लिए ठेकेदार ने 14 लाख 53हजार 400 रुपये एवं बस स्टैंड के लिए ठेकेदार ने 8 लाख 7 हजार रुपये नगर पंचायत को चुकाया है।इस परिस्थिति में एक वर्ष के अंदर इतने बड़े राशि की वसूली ठेकेदार को कहा से होगा।यह सवालिया निशान पर अधिकारियों एवं अनुसंधानकर्ता को सोचना होगा।

नही है नगर क्षेत्र में स्थायी टैक्सी एवं बस स्टैंड


नगर पंचायत कार्यालय निर्मली द्वारा टैक्सी एवं बस स्टैंड की अवैध बंदोबस्ती की जा रही है।बंदोबस्ती के नाम पर ठेकेदारों को लाखों रुपये की आमदनी होने का झांसा देकर प्रति वर्ष निविदा निकालकर टैक्सी एवं बस स्टैंड की अवैध बंदोबस्ती दी जाती है।इस प्रकरण में कार्यलय कर्मी से लेकर पहुंच वाले वार्ड पार्षद के हाथ होने से इनकार नही किया जा सकता है।तर्कसंगत बात यह है कि नगर के वार्ड संख्या 1 से 12 तक मे कही भी स्थायी टैक्सी एवं बस स्टैंड नही है।फिर बंदोबस्ती कर अवैध राशि वसूलने का प्रलोभन देकर लोगो को बंदोबस्ती दी जा रही है।

वाहन चालकों को मिली बड़ी राहत

नगर में प्रवेश करने वाले वाहन चालको को फिलहाल राहत मिली है।टेम्पू चालको की माने तो उन्हें प्रतिदिन भुतहा से नगर में आने जाने के लिए प्रतिबार 20 रुपये अदा करना पड़ता था।प्रति ट्रिप कमाई का 20 प्रतिशत राशि ठेकेदार ही ले लेते थे।ऐसा कर वसूली बिहार में कही भी नही देखा गया।निर्मली नगर कर वसूली मामले में अद्भुत था।कई बार तो कर चुकाने को लेकर घण्टो गाड़ी को बीच सड़क पर खड़ी करना पड़ता था।इसकी शिकायत नगर पंचायत जाकर भी किया गया।किन्तु नगर पंचायत में कार्यरत कर्मी ठेकेदारों पर मेहरबान लग रहे थे।

अनुसंधान में नगर पंचायत के अभिलेखों की जांच से खुल सकते है कई राज।


थाना में कांड दर्ज होते ही पुलिसिया कार्रवाई शुरू हो गई है।अनुसंधानकर्ता अभिलेखों की जाँच एवं मामले को खंगालने में लग गए है।निवर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी सहित कई कार्यलय कर्मी अनुसंधान के दायरे में आ सकते है।अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बैजनाथ सिंह ने बताया कि टैक्सी एवं बस स्टैंड स्थायी रूप से नगर में नही रहने पर किस आधार पर बंदोबस्ती की गई है।बंदोबस्ती के परवाना एवं एकरारनामा का अवलोकन भी किया जा रहा है।

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