सुपौल : निर्मली में स्वामी विवेकानंद जी की जयंती युवा दिवस के रूप में उत्साह पूर्वक मनाया गया

निर्मली(सुपौल) : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नगर इकाई- निर्मली (सुपौल) के द्वारा साहू विवाह भवन परिसर निर्मली में 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जी की जयंती युवा दिवस के रूप में उत्साह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर संगोष्टी एवं पुष्पांजलि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं परिसद गीत कर किया गया। इस मौके पर स्वामी विवेकानंद जी के जीवनी पर परिचर्चा करते हुए नगर मंत्री सूरज कुमार साह ने कहा की स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863- एवं देहावसान 4 जुलाई 1902 को हुआ था।

उनका वास्तविक नाम नरेंद्र नाथ दत्त था. वे एक महान भारतीय संत और श्री रामकृष्ण परमहंस के अनन्य शिष्य थे. वे भारतीय वेदों, दर्शन और योग के एक ऐसे संवाहक थे, जिन्होंने इस विश्व-पटल पर पहचान दिलायी. 19वीं शताब्दी के अंतिम दौर में उन्होंने ही हिंदुत्व को विश्व मंच पर एक प्रमुख धर्म के रूप में प्रस्तुत किया. औपनिवेशिक भारत में राष्ट्रवाद का सूत्रपात करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा...स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की. उन्हें अमेरिका स्थित शिकागो में वर्ष 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने और उनके ओजस्वी संबोधन "अमेरिकी बहनों और भाइयों" के लिए ख़ासतौर पर जाना जाता है...कोलकाता के एक कुलीन बंगाली परिवार में जन्मे विवेकानंद का झुकाव बचपन से ही आध्यात्म की ओर था. वे अपने गुरू श्री रामकृष्ण से काफी प्रभावित थे।
रामकृष्ण के निधन के बाद उन्होंने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और ब्रिटिश राज में भारत की परिस्थितियों का ज्ञान प्राप्त किया. उसके बाद उन्होंने अमेरिका की यात्रा की और भारत का नेतृत्व किया. उन्होंने सैकड़ों प्रवचन दिए...भारत में स्वामी विवेकानंद को देशभक्त संत के रूप में भी स्मरण किया जाता है और उनके जन्मदिवस को देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है.कार्यक्रम में छात्रसंघ अध्यक्ष मिथलेश कुमार ,नगर सह मंत्री निर्मल सिंह ,अमरेंद्र जायसवाल ,गौतम कुमार ,प्रमोद महाजन ,नवीन भगत ,रामचंद्र साह ,सुरज पाण्डे ,शशांक मेहता ,कन्हैया कुमार रौशन झा ,दानिश ,अमित साह सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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